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सेक्शन 87A के तहत टैक्स छूट कैसे पाएं? पूरी जानकारी हिंदी में

FY 2025-26 में सेक्शन 87A के तहत ₹12 लाख तक आय पर टैक्स रिबेट कैसे पाएं? जानें पूरी जानकारी हिंदी में

2026-06-12

19 Views

7 minutes read

हर साल बजट के समय एक सवाल बार-बार सामने आता है- “क्या आम करदाता को राहत मिली?” यदि आपकी कमाई एक निश्चित दायरे में है और आप नौकरीपेशा या लघु व्यवसाय से जुड़े हैं, तो सेक्शन 87A आपके टैक्स बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कई लोग 80C, 80D जैसी कटौतियों के बारे में जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग समझते हैं कि सेक्शन 87A सीधे आपके टैक्स बिल को कम कर सकता है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि 87A Income Tax in Hindi, FY 2025-26 में इसकी नई सीमा क्या है, कौन पात्र है और इसे सही तरीके से कैसे क्लेम करें।

संक्षेप में समझें

  • FY 2025-26 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक आय पर सेक्शन 87A रिबेट उपलब्ध है

  • पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में ₹5 लाख तक आय पर ₹12,500 तक की रिबेट मिलती है

  • 87A डिडक्शन नहीं, बल्कि टैक्स देयता पर सीधी रिबेट है

  • यह लाभ केवल निवासी व्यक्ति (Resident Individual) को मिलता है, NRI या HUF को नहीं

  • सही टैक्स व्यवस्था चुनकर टैक्स देयता शून्य तक की जा सकती है

सेक्शन 87A क्या है?

सेक्शन 87A आयकर अधिनियम, 1961 के तहत एक विशेष प्रावधान है जो निवासी व्यक्ति (Resident Individual) को टैक्स रिबेट देता है। यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि यह डिडक्शन नहीं है, बल्कि रिबेट है।

  • डिडक्शन आपकी कुल आय से घटती है

  • रिबेट आपकी टैक्स देयता (Tax Liability) से घटती है

उदाहरण के लिए, यदि आपकी टैक्स देयता ₹40,000 बनती है और आप 87A के तहत पात्र हैं, तो यह राशि सीधे घटकर शून्य हो सकती है। इसमें किसी निवेश की भूमिका नहीं है।

इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि सेक्शन 87A कोई “टैक्स बचत योजना” नहीं, बल्कि एक “टैक्स राहत प्रावधान” है। इसका उद्देश्य मध्यम आय वर्ग को सीधी राहत देना है, न कि उन्हें किसी निवेश योजना की ओर प्रेरित करना।

जब करदाता इस अंतर को सही तरीके से समझ लेते हैं, तो वे टैक्स प्लानिंग अधिक स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ कर पाते हैं।

सेक्शन 87A का लाभ किसे मिलता है?

बजट 2026 में सेक्शन 87A की रिबेट सीमा में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि जो सीमा पहले लागू थी, वही FY 2025-26 (AY 2026-27) में भी प्रभावी रहेगी। वर्तमान नियमों के अनुसार:

टैक्स व्यवस्था

टैक्स योग्य आय सीमा

अधिकतम रिबेट

नई टैक्स व्यवस्था

₹12,00,000 तक

₹60,000 तक

पुरानी टैक्स व्यवस्था

₹5,00,000 तक

₹12,500 तक

इसका अर्थ यह है कि यदि आपने नई टैक्स व्यवस्था चुनी है और आपकी टैक्स योग्य आय ₹12 लाख तक है, तो आप ₹60,000 तक की रिबेट प्राप्त कर सकते हैं (या वास्तविक टैक्स देयता, जो कम हो)। पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह सीमा ₹5 लाख और रिबेट ₹12,500 तक ही सीमित है।

नई टैक्स व्यवस्था में राहत क्यों अधिक है?

सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था को सरल और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से 87A की सीमा बढ़ाई है। यह कदम मध्यम आय वर्ग को राहत देने और नई व्यवस्था को प्राथमिक विकल्प बनाने के लिए उठाया गया है। यदि आपकी आय ₹12 लाख तक है और आपने नई व्यवस्था चुनी है, तो प्रभावी रूप से आपकी टैक्स देयता शून्य हो सकती है।

Do you know

क्या आप जानते हैं?

नई टैक्स व्यवस्था में सेक्शन 87A की सीमा बढ़ाकर ₹12 लाख करने से लाखों मध्यम आय वर्ग के करदाताओं की प्रभावी टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है


स्रोत: केंद्रीय बजट 2026

Cut Tax Stress 46,800

पात्रता (Eligibility Criteria)

सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट स्वतः नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। यदि इन शर्तों में से कोई भी पूरी नहीं होती, तो करदाता इस राहत का लाभ नहीं ले पाएगा। इसलिए ITR फाइल करने से पहले इन नियमों को ध्यान से समझना जरूरी है। सेक्शन 87A का लाभ पाने के लिए निम्न शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • आप भारत के निवासी व्यक्ति हों

  • आपकी कुल टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा से अधिक न हो

  • यह लाभ केवल Individual को मिलता है, HUF, कंपनी या फर्म को नहीं

  • एनआरआई (Non-Resident Indian) इस रिबेट के पात्र नहीं हैं

ध्यान रखें, आय सीमा कटौतियों (जहां लागू हो) के बाद की टैक्स योग्य आय पर लागू होती है।

क्या सीनियर सिटीजन को भी 87A मिलता है?

हाँ, यदि वे निवासी व्यक्ति हैं और उनकी आय सीमा के भीतर हैं, तो वे भी सेक्शन 87A का लाभ ले सकते हैं। सीनियर सिटीजन के लिए अलग से 87A की सीमा नहीं है, वही आय सीमा लागू होती है।

87A रिबेट कैसे क्लेम करें?

सेक्शन 87A का लाभ लेने के लिए अलग से कोई आवेदन नहीं करना पड़ता। ITR (Income Tax Return) फाइल करते समय सिस्टम स्वयं पात्रता के अनुसार रिबेट लागू कर देता है, बशर्ते आपने सही आय और टैक्स व्यवस्था चुनी हो। प्रक्रिया संक्षेप में:

  1. कुल आय की गणना करें: सबसे पहले वेतन, व्यवसाय, ब्याज, किराया या अन्य सभी स्रोतों से प्राप्त अपनी कुल वार्षिक आय को जोड़कर ग्रॉस इनकम निर्धारित करें

  2. लागू कटौतियां घटाएं (यदि पुरानी व्यवस्था चुनी है): यदि आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी है, तो 80C, 80D, HRA जैसी पात्र कटौतियों को कुल आय से घटाएं

  3. टैक्स योग्य आय निकालें: कटौतियां घटाने के बाद जो राशि बचती है, वही आपकी टैक्स योग्य आय होती है, जिसके आधार पर टैक्स की गणना की जाती है

  4. सही टैक्स व्यवस्था चुनें: अपनी आय और उपलब्ध कटौतियों की तुलना करके तय करें कि नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था में से कौन-सी आपके लिए अधिक लाभकारी है

  5. ITR फाइल करें: सभी जानकारी सही भरकर निर्धारित समय सीमा के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल करें, ताकि पात्र होने पर 87A रिबेट का लाभ मिल सके

यदि आपकी आय सीमा के भीतर है, तो 87A रिबेट स्वतः लागू हो जाएगी।

उदाहरण से समझें – सेक्शन 87A कैसे काम करता है?

नीचे कुछ सरल उदाहरण दिए गए हैं, जिससे आपको “87A Income Tax in Hindi” की वास्तविक उपयोगिता समझ आएगी।

उदाहरण 1: नई टैक्स व्यवस्था:

  • कुल आय: ₹11,80,000
  • कटौती (नई व्यवस्था में सीमित) के बाद टैक्स योग्य आय: ₹11,80,000
  • मान लें टैक्स देयता = ₹55,000

अब:

  • रिबेट (87A) = ₹55,000 (क्योंकि सीमा ₹60,000 तक है)
  • अंतिम टैक्स = ₹0

उदाहरण 2: पुरानी टैक्स व्यवस्था:

  • कुल आय: ₹4,90,000
  • टैक्स देयता = ₹10,500
  • रिबेट = ₹10,500 (₹12,500 तक उपलब्ध)
  • अंतिम टैक्स = ₹0

उदाहरण 3: आय सीमा से अधिक:

  • नई व्यवस्था में आय = ₹12,50,000

यह ₹12 लाख की सीमा से अधिक है, इसलिए रिबेट उपलब्ध नहीं होगा।

इस स्थिति में पूरा टैक्स देय रहेगा।

क्या 87A हर साल बदल सकता है?

हाँ। सेक्शन 87A की आय सीमा और रिबेट राशि को सरकार बजट के माध्यम से संशोधित कर सकती है। हालांकि, बजट 2026 में सेक्शन 87A के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वर्तमान सीमा पहले की तरह ही लागू है।

इसलिए हर वित्त वर्ष में आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या बजट दस्तावेजों से अद्यतन जानकारी अवश्य देखनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में संशोधन संभव हो सकता है।

आम गलतियां जो टैक्सपेयर्स करते हैं

सेक्शन 87A को लेकर कई करदाताओं के बीच भ्रम बना रहता है। सही जानकारी न होने के कारण वे रिबेट का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। 

  • रिबेट और डिडक्शन को एक समझ लेना

  • आय सीमा का गलत आकलन करना

  • नई और पुरानी व्यवस्था की तुलना किए बिना विकल्प चुन लेना

  • ITR में गलत आय विवरण भरना

इन गलतियों से बचकर आप अनावश्यक टैक्स भुगतान से बच सकते हैं।

सेक्शन 87A और 80C/80D में अंतर

कई करदाता यह मान लेते हैं कि 87A भी एक तरह की टैक्स बचत निवेश योजना है। यह गलतफहमी है। यह धारणा सही नहीं है और यहीं सबसे बड़ी भ्रम की स्थिति पैदा होती है। सेक्शन 87A किसी भी प्रकार का निवेश आधारित लाभ नहीं है। इसका अर्थ यह है कि:

  • आपको कोई बीमा पॉलिसी खरीदने की आवश्यकता नहीं है

  • आपको म्यूचुअल फंड, पीपीएफ या टैक्स सेविंग स्कीम में पैसा लगाने की जरूरत नहीं है

  • कोई अतिरिक्त दस्तावेज या प्रमाण निवेश के रूप में जमा नहीं करना होता

तुलना

सेक्शन 87A

सेक्शन 80C/80D

प्रकृति

टैक्स रिबेट

टैक्स डिडक्शन

प्रभाव

टैक्स देयता घटाता है

आय घटाता है

निवेश जरूरी?

नहीं

हां

इसलिए, 87A का लाभ पाने के लिए किसी विशेष निवेश की आवश्यकता नहीं

नई टैक्स व्यवस्था चुनना कब फायदेमंद है?

यदि आपकी आय ₹12 लाख तक है और आपके पास अधिक डिडक्शन क्लेम नहीं हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था में 87A का लाभ अधिक हो सकता है। लेकिन यदि आप 80C, 80D, HRA आदि के जरिए पर्याप्त कटौतियां लेते हैं, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर हो सकती है। निर्णय लेने से पहले तुलना अवश्य करें।

निष्कर्ष

सेक्शन 87A मध्यम आय वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण टैक्स राहत प्रावधान है। FY 2025-26 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक आय पर ₹60,000 तक की रिबेट उपलब्ध होना एक बड़ा बदलाव है।

यदि आप अपनी आय, टैक्स व्यवस्था और पात्रता को सही तरीके से समझ लें, तो आप अपनी टैक्स देनदारी को काफी हद तक कम कर सकते हैं, और कई मामलों में शून्य भी कर सकते हैं।

87A Income Tax in Hindi को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सीधे आपके टैक्स बिल को प्रभावित करता है, बिना किसी अतिरिक्त निवेश के।

सही योजना, सही विकल्प और समय पर ITR फाइलिंग, यही स्मार्ट टैक्स मैनेजमेंट की कुंजी है।

आसान शब्दों में

  1. टैक्स योग्य आय: कटौतियों के बाद बची वह आय जिस पर टैक्स लगाया जाता है
  2. टैक्स देयता: सरकार को देय कुल आयकर राशि
  3. टैक्स रिबेट: टैक्स देयता से सीधे घटाई जाने वाली राहत राशि
  4. असेसमेंट वर्ष: वह वर्ष जिसमें पिछली आय पर टैक्स आकलन किया जाता है
  5. निवासी व्यक्ति: आयकर नियमों के अनुसार भारत में रहने वाला करदाता
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Uncertain About Insurance?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सेक्शन 87A का लाभ केवल Resident Individual (निवासी व्यक्ति) को मिलता है। यदि उसकी टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा के भीतर है, तो वह इस रिबेट का दावा कर सकता है। यह लाभ कंपनी, फर्म, HUF या NRI को उपलब्ध नहीं है।

FY 2025-26 (AY 2026-27) में नई टैक्स व्यवस्था के तहत यदि किसी निवासी व्यक्ति की टैक्स योग्य आय ₹12 लाख तक है, तो उसे अधिकतम ₹60,000 तक की टैक्स रिबेट मिल सकती है (या वास्तविक टैक्स देयता, जो कम हो)।

हाँ, यदि आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी है, तो पहले आप 80C जैसी कटौतियों का लाभ लेकर अपनी टैक्स योग्य आय घटा सकते हैं। उसके बाद यदि आय ₹5 लाख की सीमा के भीतर आती है, तो सेक्शन 87A की रिबेट भी मिल सकती है।

नहीं। यदि आपकी टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा (नई व्यवस्था में ₹12 लाख, पुरानी में ₹5 लाख) से अधिक हो जाती है, तो सेक्शन 87A की रिबेट उपलब्ध नहीं होती। सीमा पार होने पर यह लाभ पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

हाँ। यदि आप ITR फाइल करते समय सभी आय विवरण सही भरते हैं और आपकी टैक्स योग्य आय पात्रता सीमा के भीतर है, तो आयकर प्रणाली स्वतः 87A रिबेट लागू कर देती है। इसके लिए अलग से कोई आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती।

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